Adhyay 4

Manusmriti

Shloka 260 Chapter Four

Adhyay 4
Shloka 260

Chapter Four

Subject: गृहस्थान्तार्गत आजीविका एवं व्रत विषय

260 Shloka
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Adhyay 4 Shloka 260
Shloka
अनेन विप्रो वृत्तेन वर्तयन्वेदशास्त्रवित्। व्यपेतकल्मषो नित्यं ब्रह्मलोके महीयते॥

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1 Bhashyas
Meaning
(वेदशास्त्रवित् विप्रः) वेदशास्त्र का ज्ञाता द्विज (अनेन वृत्तेन वर्तयन्) इस जीविका या व्यवहार से वर्ताव करता हुआ (व्यपेतकल्मषः) पापरहित होकर (नित्यं ब्रह्मलोके महीयते) सदा ब्रह्मलोक में रहकर आनन्द को प्राप्त करता है ॥२६०॥