Adhyay 4

Manusmriti

Shloka 259 Chapter Four

Adhyay 4
Shloka 259

Chapter Four

Subject: गृहस्थान्तार्गत आजीविका एवं व्रत विषय

260 Shloka
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Adhyay 4 Shloka 259
Shloka
एषोदिता गृहस्थस्य वृत्तिर्विप्रस्य शाश्वती। स्नातकव्रतकल्पश्च सत्त्ववृद्धिकरः शुभः॥

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Subject
उपसंहार
Meaning
(एषा) यह (गृहस्थस्य विप्रस्य) गृहस्थ द्विज की (शाश्वती वृत्तिः) नित्य की वृत्ति या दिनचर्या (उदिता) कही (च) और (सत्त्ववृद्धिकरः शुभः) सतोगुण की वृद्धिकरने वाला श्रेष्ठ (स्नातकव्रतकल्पः) स्नातकगृहस्थ के व्रतों के विधान को भी कहा॥२५९॥