Adhyay 4

Manusmriti

Shloka 258 Chapter Four

Adhyay 4
Shloka 258

Chapter Four

Subject: गृहस्थान्तार्गत आजीविका एवं व्रत विषय

260 Shloka
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Adhyay 4 Shloka 258
Shloka
एकाकी चिन्तयेन्नित्यं विविक्ते हितं आत्मनः। एकाकी चिन्तयानो हि परं श्रेयोऽधिगच्छति॥

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Subject
आत्मचिन्तन का आदेश एवं फल
Meaning
(नित्यम्) प्रतिदिन (विविक्ते) एकान्त में बैठकर (एकाकी) अकेला अर्थात् स्वयं अपनी आत्मा में (आत्मनः हितं चिन्तयेत्) अपने कल्याण की बातों का चिन्तन करे (हि) क्योंकि (एकाकी चिन्तयानः) एकाकी चिन्तन करने वाला व्यक्ति (परं श्रेयः अधिगच्छति) अधिकाधिक कल्याण को प्राप्त करता जाता है ॥२५८॥