Adhyay 4

Manusmriti

Shloka 257 Chapter Four

Adhyay 4
Shloka 257

Chapter Four

Subject: गृहस्थान्तार्गत आजीविका एवं व्रत विषय

260 Shloka
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Adhyay 4 Shloka 257
Shloka
महर्षिपितृदेवानां गत्वानृण्यं यथाविधि। पुत्रे सर्वं समासज्य वसेन्माध्यस्थ्यं आश्रितः॥

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Subject
योग्य पुत्र में गृह-कार्यों का समर्पण
Meaning
(यथाविधि) उक्त विधि के अनुसार (महर्षि-पितृ-देवानाम् अनृण्यं गत्वा) व्यक्ति (ब्रह्मचर्य-पालन एवं अध्ययन-अध्यापन से) ऋषि ऋण को, (माता-पिता आदि बुजुर्गों की सेवा एवं सन्तानोत्पत्ति से) पितृ ऋण को (यज्ञों के अनुष्ठान से) देवऋण को चुकाकर (सर्वं पुत्रे समासज्य) घर की सारी जिम्मेदारी पुत्र को सौंपकर (तत्पश्चात् वानप्रस्थ लेने से पूर्व जब तक घर में रहे तब तक) (माध्यस्थम आश्रितः) उदासीन भाव के आश्रित होकर अर्थात् सांसारिक मोह माया के प्रति विरक्त भाव रखते हुए (वसेत्) घर में निवास करे॥२५७॥