Adhyay 4

Manusmriti

Shloka 256 Chapter Four

Adhyay 4
Shloka 256

Chapter Four

Subject: गृहस्थान्तार्गत आजीविका एवं व्रत विषय

260 Shloka
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Adhyay 4 Shloka 256
Shloka
वाच्यर्था नियताः सर्वे वाङ्गूला वाग्विनिःसृताः। तांस्तु यः स्तेनयेद्वाचं स सर्वस्तेयकृन्नरः॥

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1 Bhashyas
Meaning
(वाचि सर्वे अर्था: नियताः) जिस वारणी में सब व्यवहार निश्चित हैं (वाङ्मूला:) वारणी ही जिनका मूल और (वाग् विनिःसृताः) जिस वाणी ही से सव व्यवहार सिद्ध होते हैं (यः नरः) जो मनुष्य (तां वाचं स्तेनयेत्) उस वारणी को चोरता अर्थात् मिथ्याभाषण करता है (सः सर्वस्तेयकृत्) वह जानो सब चोरी आदि पाप ही को करता है, इसलिए मिथ्याभाषरण को छोड़के सदा सत्यभाषरण ही किया करे ॥२५६॥