Adhyay 4

Manusmriti

Shloka 25 Chapter Four

Adhyay 4
Shloka 25

Chapter Four

Subject: गृहस्थान्तार्गत आजीविका एवं व्रत विषय

260 Shloka
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Adhyay 4 Shloka 25
Shloka
अग्निहोत्रं च जुहुयादाद्यन्ते द्युनिशोः सदा। दर्शेन चार्धमासान्ते पौर्णामासेन चैव हि॥

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Subject
अग्निहोत्र का विधान–
Meaning
गृहस्थ (सदा) प्रतिदिन (द्यु-निशो: आद्यन्ते) दिन-रात के आदि और अंत में अर्थात् प्रातः सांय सन्धिवेलाओं में (अग्निहोत्रम्) अग्निहोत्र (जुहुयात्) करे (च) और (अर्धमासान्ते) आवे मास के अन्त में दर्शयज्ञ अर्थात् अमावस्या का यज्ञ करे (च) तथा (एव हि पौरगंमासेन) इसी प्रकार मास पूर्ण होने पर पूर्णिमा के दिन पौर्णमास यज्ञ करे॥२५॥