Adhyay 4

Manusmriti

Shloka 243 Chapter Four

Adhyay 4
Shloka 243

Chapter Four

Subject: गृहस्थान्तार्गत आजीविका एवं व्रत विषय

260 Shloka
4/243
Adhyay 4 Shloka 243
Shloka
धर्मप्रधानं पुरुषं तपसा हतकिल्बिषम्। परलोकं नयत्याशु भास्वन्तं खशरीरिणम्॥

Bhashya

Meaning
(धर्मप्रधानम् पुरुषम्) किन्तु जो पुरुष धर्म ही को प्रधान समझता (तपसा हतकिल्विषम्) जिसका धर्म के अनुष्ठान से कर्त्तव्य पाप दूर हो गया, उस को (भास्वन्तम्) प्रकाशस्वरूप (खशरीरिणम्) और आकाश जिसका शरीरवत् है उस (परलोकम् आशु नयति) परलोक अर्थात् परमदर्शनीय परमात्मा को धर्म ही शीघ्र प्राप्त कराता है॥२४३॥