Adhyay 4

Manusmriti

Shloka 242 Chapter Four

Adhyay 4
Shloka 242

Chapter Four

Subject: गृहस्थान्तार्गत आजीविका एवं व्रत विषय

260 Shloka
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Adhyay 4 Shloka 242
Shloka
तस्माद्धर्मं सहायार्थं नित्यं संचिनुयाच्छनैः। धर्मेण हि सहायेन तमस्तरति दुस्तरम्॥

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1 Bhashyas
Meaning
(तस्मात्) उस हेतु से (सहायार्थम्) परलोक अर्थात् परजन्म में सुख और जन्म के सहायार्थ (नित्यं धर्मं शनैः संचिनुयात्) नित्य धर्म का संचय धीरे-धीरे करता जाये (हि) क्योंकि (धर्मेरण सहायेन) धर्म ही के सहाय से (दुस्तरं तमः तरति) बड़े-बड़े दुस्तर दुःखसागर को जीव तर सकता है॥२४२॥