Adhyay 4

Manusmriti

Shloka 239 Chapter Four

Adhyay 4
Shloka 239

Chapter Four

Subject: गृहस्थान्तार्गत आजीविका एवं व्रत विषय

260 Shloka
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Adhyay 4 Shloka 239
Shloka
नामुत्र हि सहायार्थं पिता माता च तिष्ठतः। न पुत्रदारं न ज्ञातिर्धर्मस्तिष्ठति केवलः॥

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Meaning
(हि) क्योंकि (अमुत्र) परलोक में (न पिता-माता, न पुत्र दारं न ज्ञातिः सहायार्थं तिष्ठतः) न माता, न पिता, न पुत्र, न स्त्री, न ज्ञाति सहाय कर सकते हैं, किन्तु (केवल: धर्म: तिष्ठति) एक धर्म ही सहायक होता है ॥२३९॥