Adhyay 4

Manusmriti

Shloka 238 Chapter Four

Adhyay 4
Shloka 238

Chapter Four

Subject: गृहस्थान्तार्गत आजीविका एवं व्रत विषय

260 Shloka
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Adhyay 4 Shloka 238
Shloka
धर्मं शनैः संचिनुयाद्वल्मीकं इव पुत्तिकाः। परलोकसहायार्थं सर्वभूतान्यपीडयन्॥

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1 Bhashyas
Subject
धर्मसंचय का विधान एवं धर्मप्रशंसा
Meaning
(पुत्तिका वल्मीकम् इव) जैसे पुत्तिका अर्थात् दीमक वल्मीक अर्थात् बांबी को बनाती है वैसे (सर्वलोकानि अपीडयन्) सब भूतों को पीड़ा न देकर (परलोक-सहायार्थम्) परलोक अर्थात् परजन्म के सुखार्थ (शनैः धर्मं संचिनुयात्) धीरे-धीरे धर्म का संचय करे॥२३८॥