Adhyay 4

Manusmriti

Shloka 233 Chapter Four

Adhyay 4
Shloka 233

Chapter Four

Subject: गृहस्थान्तार्गत आजीविका एवं व्रत विषय

260 Shloka
4/233
Adhyay 4 Shloka 233
Shloka
सर्वेषां एव दानानां ब्रह्मदानं विशिष्यते। वार्यन्नगोमहीवासस् तिलकाञ्चनसर्पिषाम्॥

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Subject
वेद-दान की सर्वश्रेष्ठता
Meaning
(सर्वेषाम् एव दानानाम्) संसार में जितने दान हैं अर्थात् (वारि-अन्नगो-मही-वासः-तिल- कांचन-सर्पिषाम्) जल, अन्न, गौ, पृथिवी, वस्त्र, तिल, सुवर्ण और घृतादि इन सब दानों से (ब्रह्मदानं विशिष्यते) वेदविद्या का दान प्रतिश्रेष्ठ है ॥२३३॥