Adhyay 4

Manusmriti

Shloka 227 Chapter Four

Adhyay 4
Shloka 227

Chapter Four

Subject: गृहस्थान्तार्गत आजीविका एवं व्रत विषय

260 Shloka
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Adhyay 4 Shloka 227
Shloka
दानधर्मं निषेवेत नित्यं ऐष्टिकपौर्तिकम्। परितुष्टेन भावेन पात्रं आसाद्य शक्तितः॥

Bhashya

Subject
दानधर्म के पालन का कथन
Meaning
द्विज (पात्रम् आसाद्य) सुपात्र को देखकर (परितुष्टेन भावेन) प्रसन्न मन से (शक्तित:) शक्ति के अनुसार (नित्यम्) सदैव (ऐष्टिक-पौर्तिकम्) . यज्ञों के आयोजनसम्बन्धी और उपकारार्थ कुत्रा, तालाब आदि निर्माणसम्बन्धी (दानधर्मं निषेवेत) दानधर्म का पालन करे अर्थात् दान दिया करे॥२२७॥