Adhyay 4

Manusmriti

Shloka 203 Chapter Four

Adhyay 4
Shloka 203

Chapter Four

Subject: गृहस्थान्तार्गत आजीविका एवं व्रत विषय

260 Shloka
4/203
Adhyay 4 Shloka 203
Shloka
नदीषु देवखातेषु तडागेषु सरःसु च। स्नानं समाचरेन्नित्यं गर्तप्रस्रवणेषु च॥

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
(नदीषु) नदियों में (देवखातेषु) प्राकृतिक जलाशयों में (तडागेषु) तालाबों में (सरःसु) झरनों में (च) और (गर्तप्रस्रवणेषु) ऐसे गड्ढों में जिनका बहता पानी हो (नित्यं स्नानं समाचरेत्) सदा स्नान करना चाहिए ॥२०३॥