Adhyay 4

Manusmriti

Shloka 201 Chapter Four

Adhyay 4
Shloka 201

Chapter Four

Subject: गृहस्थान्तार्गत आजीविका एवं व्रत विषय

260 Shloka
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Adhyay 4 Shloka 201
Shloka
परकीयनिपानेषु न स्नायाद्धि कदा चन। निपानकर्तुः स्नात्वा तु दुष्कृतांशेन लिप्यते॥

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1 Bhashyas
Meaning
(परकीयनिपानेषु कदाचन न स्नायात्) दूसरों के हौज या टप में कभी न नहाये (तु) क्योंकि (स्नात्वा) वहां नहाकर (निपानकर्त्तु: दुष्कृतांशेन लिप्यते) हौज या टप वाले की गन्दगी या बीमारी से नहाने वाला लिप्त हो जाता है अर्थात् उसकी बीमारियां लग जाती हैं ॥२०१॥