Adhyay 4

Manusmriti

Shloka 2 Chapter Four

Adhyay 4
Shloka 2

Chapter Four

Subject: गृहस्थान्तार्गत आजीविका एवं व्रत विषय

260 Shloka
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Adhyay 4 Shloka 2
Shloka
अद्रोहेणैव भूतानां अल्पद्रोहेण वा पुनः। या वृत्तिस्तां समास्थाय विप्रो जीवेदनापदि॥

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1 Bhashyas
Meaning
(विप्रः) द्विज व्यक्ति (अनापदि) आपत्तिरहितकाल में (भूतानाम् अद्रोहेण एव) प्राणियों को जिससे किसी प्रकार की पीड़ा न पहुंचे (वा) अथवा (पुनः) ऐसी वृत्ति न मिलने पर बाद में (अल्पद्रोहेण) जिसमें प्राणियों को कम से कम पीड़ा हो ऐसी (या वृत्तिः) जो वृत्ति= आजीविका हो (तां समास्थाय जीवेत्) उसको अपनाकर जीवननिर्वाह करे॥२॥