Adhyay 4

Manusmriti

Shloka 196 Chapter Four

Adhyay 4
Shloka 196

Chapter Four

Subject: गृहस्थान्तार्गत आजीविका एवं व्रत विषय

260 Shloka
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Adhyay 4 Shloka 196
Shloka
अधोदृष्टिर्नैष्कृतिकः स्वार्थसाधनतत्परः। शठो मिथ्याविनीतश्च बकव्रतचरो द्विजः॥

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1 Bhashyas
Subject
बकव्रतिक का लक्षण
Meaning
(अधोदृष्टि:) कीत्ति के लिए नीचे दृष्टि रखे (नैष्कृतिक:) ईर्ण्यक, किसी ने उस का पैसा भर अपराध किया हो तो उसका बदला प्राण तक लेने को तत्पर रहे (स्वार्थसाधनतत्परः) चाहे कपट, अधर्म, विश्वासघात क्यों न हो अपना प्रयोजन साधने में चतुर (शठः) चाहे अपनी बात झूठी क्यों न हो परन्तु हठ कभी न छोड़ (मिथ्याविनीतः) झूठ-मूंठ ऊपर से शील, सन्तोष और साधुता दिखलावे, उस को (बकव्रतचर: द्विजः) बगुले के समान नीच समझो ॥१९६॥