Adhyay 4

Manusmriti

Shloka 195 Chapter Four

Adhyay 4
Shloka 195

Chapter Four

Subject: गृहस्थान्तार्गत आजीविका एवं व्रत विषय

260 Shloka
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Adhyay 4 Shloka 195
Shloka
धर्मध्वजी सदा लुब्धश्छाद्मिको लोकदम्भकः। बैडालव्रतिको ज्ञेयो हिंस्रः सर्वाभिसंधकः॥

Bhashya

Subject
बैडाल व्रतिक का लक्षण
Meaning
(धर्मध्वजी) धर्म कुछ भी न करे परन्तु धर्म के नाम से लोगों को ठगे (सदालुब्धः) सर्वदा लोभ से युक्त (छामिकः) कपटी (लोकदम्भकः) संसारी मनुष्यों के सामने अपने बड़ाई के गपोड़े मारा करे (हिंस्रः) प्राणियों का घातक अन्य से वैर बुद्धि रखने वाला (सर्व + अभिसन्धकः) सब अच्छे और बुरों से भी मेल रखे उसको (बैडालव्रतिकः ज्ञेयः) बैडालव्रतिक अर्थात् विड़ाल के समान धूर्त्त और नीच समझो ॥१९५॥