Adhyay 4

Manusmriti

Shloka 193 Chapter Four

Adhyay 4
Shloka 193

Chapter Four

Subject: गृहस्थान्तार्गत आजीविका एवं व्रत विषय

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Adhyay 4 Shloka 193
Shloka
त्रिष्वप्येतेषु दत्तं हि विधिनाप्यर्जितं धनम्। दातुर्भवत्यनर्थाय परत्रादातुरेव च॥

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
(विधिना अर्जितं धनम् एतेषु त्रिषु दत्तं हि) जो धर्म से प्राप्त हुए धन का उक्त तीनों को देना है वह दान (दातुः अनर्थाय भवति) दाता का नाश इसी जन्म (च) और (अदातुः परत्र एव) लेने वाले का नाश परजन्म में करता है॥१९३॥