Adhyay 4

Manusmriti

Shloka 190 Chapter Four

Adhyay 4
Shloka 190

Chapter Four

Subject: गृहस्थान्तार्गत आजीविका एवं व्रत विषय

260 Shloka
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Adhyay 4 Shloka 190
Shloka
अतपास्त्वनधीयानः प्रतिग्रहरुचिर्द्विजः। अम्भस्यश्मप्लवेनेव सह तेनैव मज्जति॥

Bhashya

Subject
दान लेने के अनधिकारी
Meaning
एक- (अतपाः) ब्रह्मचर्य-सत्यभाषणादि तपरहित, दूसरा- (अनधीयानः) विना पढ़ा हुआ, तीसरा- (प्रतिग्रहरुचिः) अत्यन्त धर्मार्थ दूसरों से दान लेने वाला, ये तीनों (अश्मप्लवेन अम्भसि इव) पत्थर की नौका से समुद्र में तैरने के समान (तेन सह एव मज्जति) अपने दुष्ट कर्मों के साथ ही दुःखसागर में डूबते हैं ॥१९०॥