Adhyay 4

Manusmriti

Shloka 186 Chapter Four

Adhyay 4
Shloka 186

Chapter Four

Subject: गृहस्थान्तार्गत आजीविका एवं व्रत विषय

260 Shloka
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Adhyay 4 Shloka 186
Shloka
प्रतिग्रहसमर्थोऽपि प्रसङ्गं तत्र वर्जयेत्। प्रतिग्रहेण ह्यस्याशु ब्राह्मं तेजः प्रशाम्यति॥

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Subject
(पुत्रेरण) पुत्र के साथ
Meaning
ब्राह्मण (प्रतिग्रहः समर्थ: अपि) दान लेने का अधिकारी होते हुए भी (तत्र प्रसंगं वर्जयेत्) दान प्राप्ति में आसक्तिभाव को छोड़ देवे (हि) क्योंकि (प्रतिग्रहेण) दान लेते रहने से (ग्रस्य ब्राह्म तेज:) इसका ब्राह्मतेज (आशु प्रशाम्यति) शीघ्र शान्त होने लगता है॥१८६॥