Adhyay 4

Manusmriti

Shloka 180 Chapter Four

Adhyay 4
Shloka 180

Chapter Four

Subject: गृहस्थान्तार्गत आजीविका एवं व्रत विषय

260 Shloka
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Adhyay 4 Shloka 180
Shloka
मातापितृभ्यां जामीभिर्भ्रात्रा पुत्रेण भार्यया। दुहित्रा दासवर्गेण विवादं न समाचरेत्॥

Bhashya

Subject
विवाद न करने योग्य व्यक्ति
Meaning
(ऋत्विक्) यज्ञ का कराने हारा (पुरोहित) सदा उत्तम चाल-चलन की शिक्षा कारक (आचार्य) विद्या पढ़ाने हारा (मातुल) मामा (अतिथि) अर्थात् जिसकी कोई आने की निश्चित तिथि न हो (संश्रित) अपने आश्रित (बाल) बालक (वृद्ध) बुढ्ढे (आतुर) पीड़ित (वैद्य) आयुर्वेद का ज्ञाता (ज्ञाति) स्वगोत्रस्थ वा स्ववर्णस्थ (सम्बन्धी) श्वसुर आदि (बान्धव) मित्र (माता) माता (पिता) पिता (यामि) बहन (भ्राता) भाई (भार्या) स्त्री (दुहित्रा) पुत्री . (दासवर्गेरण) और सेवक लोगों से (विवादं न समाचरेत्) विवाद अर्थात् विरुद्ध लड़ाई-बखेड़ा कभी न करे ॥१८०॥