Adhyay 4

Manusmriti

Shloka 178 Chapter Four

Adhyay 4
Shloka 178

Chapter Four

Subject: गृहस्थान्तार्गत आजीविका एवं व्रत विषय

260 Shloka
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Adhyay 4 Shloka 178
Shloka
येनास्य पितरो याता येन याताः पितामहाः। तेन यायात्सतां मार्गं तेन गच्छन्न रिष्यति॥

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1 Bhashyas
Meaning
(येन अस्य पितरः) जिस मार्ग से इसके पिता (पितामहाः याताः) पितामह चले हों (तेन यायात्) उस मार्ग में सन्तान भी चले, परन्तु (सतां मार्गम्) जो सत्पुरुष पिता, पितामह हों उन्हीं के मार्ग में चलें और जो पिता, पितामह दुष्ट हों तो उनके मार्ग में कभी न चलें (तेन गच्छन् न रिष्यते) क्योंकि उत्तम धर्मात्मा पुरुषों के मार्ग में चलने से दुःख कभी नहीं होता ॥१७८॥