Adhyay 4

Manusmriti

Shloka 177 Chapter Four

Adhyay 4
Shloka 177

Chapter Four

Subject: गृहस्थान्तार्गत आजीविका एवं व्रत विषय

260 Shloka
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Adhyay 4 Shloka 177
Shloka
न पाणिपादचपलो न नेत्रचपलोऽनृजुः। न स्याद्वाक्चपलश्चैव न परद्रोहकर्मधीः॥

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1 Bhashyas
Meaning
(पाणि-पाद-चपल: न) हाथ-पैरों से चंचलता के कार्य न करे (नेत्रचपलः न) आंखों से चंचलतायुक्त काम न करे (अनुजु:) कुटिलता न करे (वाक्-चपल: एव न) वाणी से चपलता न करे (च) और (परद्रोहकमंधी: न स्यात्) दूसरों की हानि या द्वेष के कर्मों में मन लगाने वाला न बने॥१७७॥