Adhyay 4

Manusmriti

Shloka 176 Chapter Four

Adhyay 4
Shloka 176

Chapter Four

Subject: गृहस्थान्तार्गत आजीविका एवं व्रत विषय

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Adhyay 4 Shloka 176
Shloka
परित्यजेदर्थकामौ यौ स्यातां धर्मवर्जितौ। धर्मं चाप्यसुखोदर्कं लोकसंक्रुष्टं एव च॥

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1 Bhashyas
Meaning
(अर्थकामौ यो धर्मवजितौ स्यांतां परित्यजेत्) यदि बहुत-सा धन, राज्य और अपनी कामना अधर्म से सिद्ध होती हो तो भी अधर्म सर्वथा छोड़ देवें (च) और (धर्मम् अपि असुखोदकंम्) वेदविरुद्ध धर्माभास जिसके करने से उत्तरकाल में दुःख (च) और (लोकविक्रुष्टम् एव) संसार की उन्नति का नाश हो वैसा नाममात्र धर्म और कर्म कभी न किया करें ॥१७६॥