Adhyay 4

Manusmriti

Shloka 175 Chapter Four

Adhyay 4
Shloka 175

Chapter Four

Subject: गृहस्थान्तार्गत आजीविका एवं व्रत विषय

260 Shloka
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Adhyay 4 Shloka 175
Shloka
सत्यधर्मार्यवृत्तेषु शौचे चैवारमेत्सदा। शिष्यांश्च शिष्याद्धर्मेण वाग्बाहूदरसंयतः॥

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1 Bhashyas
Meaning
इसलिए मनुष्यों को योग्य है कि (सत्यधर्मं + आर्य-वृत्तेषु) सत्यधर्म और अर्थात् उत्तम पुरुषों के चरणों (च) और (शौचे). भीतर-बाहर की पवित्रता में (सदा प्रारमेत्) सदा रमरण करें (वाक् +बाहु + उदर + संयतः च धर्मेण) अपनी वाणी, वाहू, उदर को नियम और सत्यधर्म के साथ वर्त्तमान रखके (शिष्यान्-शिष्यात्) शिष्यों को सदा शिक्षा किया करें॥१७५॥