Adhyay 4

Manusmriti

Shloka 172 Chapter Four

Adhyay 4
Shloka 172

Chapter Four

Subject: गृहस्थान्तार्गत आजीविका एवं व्रत विषय

260 Shloka
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Adhyay 4 Shloka 172
Shloka
नाधर्मश्चरितो लोके सद्यः फलति गौरिव। शनैरावर्त्यमानस्तु कर्तुर्मूलानि कृन्तति॥

Bhashya

Meaning
मनुष्य निश्चय करके जाने कि (लोके) इस संसार में (गौः इव) जैसे गाय की सेवा का फल दूध आदि शीघ्र प्राप्त नहीं होता वैसे ही (चरितः अधर्म: सद्यः न फलति) किये हुए अधर्म का फल भी शीघ्र नहीं होता (तु) किन्तु (शनै: कर्तु: आवर्त्तमानः) धीरे-धीरे अधर्मकर्ता के सुखों को रोकता हुआ (मूलानि कृन्तति) सुख के मूलों को काट देता है पश्चात् अधर्मी दुःख ही दुःख भोगता है ॥१७२॥