Adhyay 4

Manusmriti

Shloka 170 Chapter Four

Adhyay 4
Shloka 170

Chapter Four

Subject: गृहस्थान्तार्गत आजीविका एवं व्रत विषय

260 Shloka
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Adhyay 4 Shloka 170
Shloka
अधार्मिको नरो यो हि यस्य चाप्यनृतं धनम्। हिंसारतश्च यो नित्यं नेहासौ सुखं एधते॥

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1 Bhashyas
Subject
अधर्म निन्दा एवं फल
Meaning
(य: अधार्मिकः नरः) जो अधार्मिक मनुष्य है (च) और (यस्य हि अनृतं घनम्) जिसका अधर्म से संचित किया हुआ धन है (च) और (य: नित्यं हिसारतः) जो सदा हिंसा में अर्थात् वैर में प्रवृत्त रहता है (असौ) वह (इह) इस लोक और परलोक अर्थात् परजन्म में (सुखं न एधते) सुख को कभी नहीं प्राप्त हो सकता॥१७०॥