Adhyay 4

Manusmriti

Shloka 164 Chapter Four

Adhyay 4
Shloka 164

Chapter Four

Subject: गृहस्थान्तार्गत आजीविका एवं व्रत विषय

260 Shloka
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Adhyay 4 Shloka 164
Shloka
परस्य दण्डं नोद्यच्छेत्क्रुद्धो नैनं निपातयेत्। अन्यत्र पुत्राच्छिष्याद्वा शिष्ट्यर्थं ताडयेत्तु तौ॥

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
(पुत्रात् वा शिष्यात् अन्यत्र) पुत्र और शिष्य से भिन्न (परस्य दण्डं न उद्यच्छेत्) अन्य किसी व्यक्ति पर दण्डा न उठाये अर्थात् दण्डे से न मारे (क्रुद्धः एव न निपातयेत्) और क्रोधित होकर भी किसी को न मारे वध न करे, (तो तु शिष्ट्यर्थं ताडयेत्) केवल उन – पुत्र और शिष्य को शिक्षा देने के लिये ही ताड़ना करे ॥१६४॥