Adhyay 4

Manusmriti

Shloka 161 Chapter Four

Adhyay 4
Shloka 161

Chapter Four

Subject: गृहस्थान्तार्गत आजीविका एवं व्रत विषय

260 Shloka
4/161
Adhyay 4 Shloka 161
Shloka
यत्कर्म कुर्वतोऽस्य स्यात्परितोषोऽन्तरात्मनः। तत्प्रयत्नेन कुर्वीत विपरीतं तु वर्जयेत्॥

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Subject
कर्त्तव्य-प्रकर्त्तव्य कर्म का मानदण्ड
Meaning
(यत् कर्म कुर्वतः) जिस कर्म के करने से (अस्य अन्तरात्मनः परितोषः स्यात्) मनुष्य की आत्मा को संतुष्टि एवं प्रसन्नता अनुभव हो (तत्-तत् प्रयत्नेन कुर्वीत) उस उस कर्म को प्रयत्नपूर्वक करे (विपरीतं तु वर्जयेत्) जिससे संतुष्टि एवं प्रसन्नता न हो उस कर्म को न करे ॥१६१॥