Adhyay 4

Manusmriti

Shloka 159 Chapter Four

Adhyay 4
Shloka 159

Chapter Four

Subject: गृहस्थान्तार्गत आजीविका एवं व्रत विषय

260 Shloka
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Adhyay 4 Shloka 159
Shloka
यद्यत्परवशं कर्म तत्तद्यत्नेन वर्जयेत्। यद्यदात्मवशं तु स्यात्तत्तत्सेवेत यत्नतः॥

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1 Bhashyas
Meaning
मनुष्य (यत्-यत् परवशं कर्म) जो पराधीन कर्म हो (तत्-तत् यत्नेन वर्जयेत्) उस उस को प्रयत्न से सदा छोड़े (तु) और (यत्-यत् प्रात्मवशं स्यात्) जो-जो स्वाधीन कर्म हो (तत्-तत् यत्नतः सेवेत) उस उस का सेवन प्रयत्न से किया करे॥१५९॥