Adhyay 4

Manusmriti

Shloka 158 Chapter Four

Adhyay 4
Shloka 158

Chapter Four

Subject: गृहस्थान्तार्गत आजीविका एवं व्रत विषय

260 Shloka
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Adhyay 4 Shloka 158
Shloka
सर्वलक्षणहीनोऽपि यः सदाचारवान्नरः। श्रद्दधानोऽनसूयश्च शतं वर्षाणि जीवति॥

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Meaning
(यः) जो (सर्वलक्षणहीन: अपि सदाचारवान्) सब अच्छे लक्षणों से हीन भी होकर सदाचारयुक्त (श्रद्दधानः) सत्य में श्रद्धा (च) और (अनसूय:) निन्दा आदि दोष रहित होता है (शतं वर्षारिंग जीवति) वह सुख से सौ वर्ष पर्यन्त जीता है॥ १५८॥