Adhyay 4

Manusmriti

Shloka 157 Chapter Four

Adhyay 4
Shloka 157

Chapter Four

Subject: गृहस्थान्तार्गत आजीविका एवं व्रत विषय

260 Shloka
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Adhyay 4 Shloka 157
Shloka
दुराचारो हि पुरुषो लोके भवति निन्दितः। दुःखभागी च सततं व्याधितोऽल्पायुरेव च॥

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
(दुराचार: हि पुरुषः) जो दुष्टाचारी पुरुष है वह (लोके निन्दितः) संसार में सज्जनों के मध्य में निन्दा को प्राप्त (दुःखभागी) दुःखभागी (च) और (सततं व्याधित:) निरन्तर व्याधियुक्त होकर (अल्पायुः एव भवति) अल्पायु का भी भोगने हारा होता है ॥१५७॥