Adhyay 4

Manusmriti

Shloka 154 Chapter Four

Adhyay 4
Shloka 154

Chapter Four

Subject: गृहस्थान्तार्गत आजीविका एवं व्रत विषय

260 Shloka
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Adhyay 4 Shloka 154
Shloka
अभिवादयेद्वृद्धांश्च दद्याच्चैवासनं स्वकम्। कृताञ्जलिरुपासीत गच्छतः पृष्ठतोऽन्वियात्॥

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1 Bhashyas
Meaning
(वृद्धान्) सदा विद्यावृद्धों और वयोवृद्धों को (अभिवादयेत्) नमस्ते अर्थात् उनका मान्य किया करे (स्वकम् आसनं च एव दद्यात्) जब वे अपने समीप वें तब उठकर, मान्यपूर्वक अपने आसन पर बैठावे (च) और (कृत + अञ्जलि: उपासीत) हाथ जोड़ के आप समीप बैठे, पूछे वह उत्तर देवे (गच्छतः पृष्ठतः अन्वियात्). और जब जाने लगें तब थोड़ी दूर पीछे-पीछे जाकर नमस्ते कर, विदा करे॥१५४॥