Adhyay 4

Manusmriti

Shloka 15 Chapter Four

Adhyay 4
Shloka 15

Chapter Four

Subject: गृहस्थान्तार्गत आजीविका एवं व्रत विषय

260 Shloka
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Adhyay 4 Shloka 15
Shloka
नेहेतार्थान्प्रसङ्गेन न विरुद्धेन कर्मणा। न विद्यमानेष्वर्थेषु नार्त्यां अपि यतस्ततः॥

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1 Bhashyas
Meaning
गृहस्थ (प्रसंगेन अर्थान् न ईहेत) कभी किसी दुष्ट के प्रसंग से द्रव्यसंचय न करे (न विरुद्धेन कर्मणा) न विरुद्ध कर्म से (न विद्यमानेषु अर्थेषु यतस्ततः) न विद्यमान पदार्थ होते हुए उनको गुप्त रखके अथवा दूसरे से छल करके और (न आर्त्याम् अपि) चाहे कितना ही दुःख पड़ तदपि अधर्मं से द्रव्यसंचय कभी न करे ॥१५॥