Adhyay 4

Manusmriti

Shloka 149 Chapter Four

Adhyay 4
Shloka 149

Chapter Four

Subject: गृहस्थान्तार्गत आजीविका एवं व्रत विषय

260 Shloka
4/149
Adhyay 4 Shloka 149
Shloka
पौर्विकीं संस्मरन्जातिं ब्रह्मैवाभ्यस्यते पुनः। ब्रह्माभ्यासेन चाजस्रं अनन्तं सुखं अश्नुते॥

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
(पौर्विकी जाति संस्मरन्) पूर्वजन्म की अवस्था का स्मरण करते हुए (पुनः ब्रह्म एव अभ्यसते) फिर भी यदि वेद के अभ्यास में लगा रहता है तो (अजस्र ब्रह्माभ्यासेन) निरन्तर वेद का अभ्यास करने से (अनन्तं सुखम् अश्नुते) मोक्ष-सुख को प्राप्त कर लेता है ॥१४९॥