Adhyay 4

Manusmriti

Shloka 148 Chapter Four

Adhyay 4
Shloka 148

Chapter Four

Subject: गृहस्थान्तार्गत आजीविका एवं व्रत विषय

260 Shloka
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Adhyay 4 Shloka 148
Shloka
वेदाभ्यासेन सततं शौचेन तपसैव च। अद्रोहेण च भूतानां जातिं स्मरति पौर्विकीम्॥

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Subject
वेदाभ्यास का कथन और उसका फल
Meaning
मनुष्य (सततं वेदाभ्यासेन) निरन्तर वेद का अभ्यास करने से (शौचेन) आत्मिक तथा शारीरिक पवित्रता से (च) तथा (तपसा) तपस्या से (च) और (भूतानाम् द्रोण) प्राणियों के साथ द्रोहभावना न रखते हुए अर्थात् अहिंसाभावना रखते हुए (पौविकी जाति स्मरति) पूर्वजन्म की अवस्था को स्मरण कर लेता है ॥१४८॥