Adhyay 4

Manusmriti

Shloka 146 Chapter Four

Adhyay 4
Shloka 146

Chapter Four

Subject: गृहस्थान्तार्गत आजीविका एवं व्रत विषय

260 Shloka
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Adhyay 4 Shloka 146
Shloka
मङ्गलाचारयुक्तानां नित्यं च प्रयतात्मनाम्। जपतां जुह्वतां चैव विनिपातो न विद्यते॥

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1 Bhashyas
Meaning
(मङ्गल + आचार + युक्तानाम) जो सदाकल्याणकारी कार्यों में लगे रहते हैं अथवा जो श्रेष्ठ आचरण का पालन करते हैं (च) और (नित्यं प्रयतात्मनाम्) जो सदा उन्नति के लिए प्रयत्नशील रहते हैं (च) तथा (जपताम्) जो परमात्मा का जाप करते हैं (जुह्वताम्) जो हवन करते हैं, उनकी (विनि पातः) अवनति नहीं होती ॥१४६॥