Adhyay 4

Manusmriti

Shloka 145 Chapter Four

Adhyay 4
Shloka 145

Chapter Four

Subject: गृहस्थान्तार्गत आजीविका एवं व्रत विषय

260 Shloka
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Adhyay 4 Shloka 145
Shloka
मङ्गलाचारयुक्तः स्यात्प्रयतात्मा जितेन्द्रियः। जपेच्च जुहुयाच्चैव नित्यं अग्निं अतन्द्रितः॥

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1 Bhashyas
Meaning
(मङ्गल + प्राचार + युक्तः) कल्याणकारी कार्यों में लगा रहने वाला या श्रेष्ठ आचरणवाला (प्रयतात्मा) उन्नति के लिए सदा प्रयत्नशील (जितेन्द्रियः) जितेन्द्रिय (स्यात्) रहे (च) और (नित्यम्) प्रतिदिन (अतन्द्रितः) आलस्य रहित होकर (जपेत्) जपोपासना करे (च एव) तथा (जुहुयात्) हवन करे॥१४५॥