Adhyay 4

Manusmriti

Shloka 141 Chapter Four

Adhyay 4
Shloka 141

Chapter Four

Subject: गृहस्थान्तार्गत आजीविका एवं व्रत विषय

260 Shloka
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Adhyay 4 Shloka 141
Shloka
हीनाङ्गानतिरिक्ताङ्गान्विद्याहीनान्वयोऽधिकान्। रूपद्रविणहीनांश्च जातिहीनांश्च नाक्षिपेत्॥

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
(हीन + अङ्गान्) कम अंगों वालों या अपंगों पर (अतिरिक्त + अङ्गान्) अधिक अङ्गों वाले (विद्याहीनान्) मूर्ख (वय + अधिकान्) आयु में बड़े (च) और (रूप-द्रव्य-विहीनान्) रूप और धन से रहित (च) और (जातिहीनान्) निम्न वंश वाले, इन पर (नक्षिपेत्) कभी आक्षेप [ = व्यंग या मजाक ] न करे ॥१४१॥