Adhyay 4

Manusmriti

Shloka 14 Chapter Four

Adhyay 4
Shloka 14

Chapter Four

Subject: गृहस्थान्तार्गत आजीविका एवं व्रत विषय

260 Shloka
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Adhyay 4 Shloka 14
Shloka
वेदोदितं स्वकं कर्म नित्यं कुर्यादतन्द्रितः। तद्धि कुर्वन्यथाशक्ति प्राप्नोति परमां गतिम्॥

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1 Bhashyas
Subject
गृहस्थों के लिये सतोगुणवर्धक व्रत
Meaning
ब्राह्मणादि द्विज (वेदोदितं स्वकं कर्म) वेदोक्त अपने कर्म को (अतन्द्रितः नित्यं कुर्यात्) आलस्य छोड़के नित्य किया करें (तत् हि यथाशक्ति कुर्वन्) उसको अपने सामर्थ्य के अनुसार करते हुए (परमां गति प्राप्नोति) मुक्ति पर्यन्त पदार्थों को प्राप्त होते हैं॥१४ || (सं० वि० गृहाश्रम वि०)