Adhyay 4

Manusmriti

Shloka 137 Chapter Four

Adhyay 4
Shloka 137

Chapter Four

Subject: गृहस्थान्तार्गत आजीविका एवं व्रत विषय

260 Shloka
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Adhyay 4 Shloka 137
Shloka
नात्मानं अवमन्येत पुर्वाभिरसमृद्धिभिः। आ मृत्योः श्रियं अन्विच्छेन्नैनां मन्येत दुर्लभाम्॥

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1 Bhashyas
Subject
मात्महीनता-मनुभव-निषेध
Meaning
गृहस्थ द्विज कभी (पुर्वाभिः असमृद्धिभिः) प्रथम पुष्कल धनी होके पश्चात् दरिद्र हो जायें, उससे (आत्मानं न अवमन्येत) अपने आत्मा का अपमान न करें कि 'हाय हम निर्धन हो गये' इत्यादि विलाप भी न करें, किन्तु (आमृत्योः) मृत्युपर्यन्त (श्रियम अन्विच्छेत्) लक्ष्मी की उन्नति में पुरुषार्थं किया करें, और (एनां दुर्लभां न मन्येत) लक्ष्मी को दुर्लभ न समझें॥१३७॥