Adhyay 4

Manusmriti

Shloka 134 Chapter Four

Adhyay 4
Shloka 134

Chapter Four

Subject: गृहस्थान्तार्गत आजीविका एवं व्रत विषय

260 Shloka
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Adhyay 4 Shloka 134
Shloka
न हीदृशं अनायुष्यं लोके किं चन विद्यते। यादृशं पुरुषस्येह परदारोपसेवनम्॥

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1 Bhashyas
Subject
परस्त्रीसेवन-निन्दा
Meaning
गृहस्थ द्विज का (इह लोके) इस संसार में (पुरुषस्य अनायुष्यं ईशं किंचन न हि विद्यते) पुरुष की आयु को घटाने वाला ऐसा कोई काम नहीं (याडशम्) जैसा कि (परदारा-उपसेवनम्) परस्त्रीगमन करना है॥१३४॥