Adhyay 4

Manusmriti

Shloka 128 Chapter Four

Adhyay 4
Shloka 128

Chapter Four

Subject: गृहस्थान्तार्गत आजीविका एवं व्रत विषय

260 Shloka
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Adhyay 4 Shloka 128
Shloka
अमावास्यां अष्टमीं च पौर्णमासीं चतुर्दशीम्। ब्रह्मचारी भवेन्नित्यं अप्यृतौ स्नातको द्विजः॥

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1 Bhashyas
Meaning
(स्नातक: द्विजः) गृहस्थ द्विज को चाहिये कि वह (ऋतौ अपि) ऋतुकाल होते हुए भी (अमावस्याम् अष्टमी पौर्णमासीं च चतुर्दशीम्) अमावस्या, अष्टमी, पूर्णिमा और चतुर्दशी के दिन (ब्रह्मचारी भवेत्) ब्रह्मचारी रहे ॥१२८॥