Adhyay 4

Manusmriti

Shloka 12 Chapter Four

Adhyay 4
Shloka 12

Chapter Four

Subject: गृहस्थान्तार्गत आजीविका एवं व्रत विषय

260 Shloka
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Adhyay 4 Shloka 12
Shloka
संतोषं परं आस्थाय सुखार्थी संयतो भवेत्। संतोषमूलं हि सुखं दुःखमूलं विपर्ययः॥

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1 Bhashyas
Meaning
(सुखार्थी) सुख चाहने वाला व्यक्ति (परमं सन्तोषम् आस्थाय) अत्यन्त संतोष को धारण करके (संयतः भवेत्) संयत = अधिक धन के संग्रह की इच्छा न रखनेवाला बने (हि) क्योंकि (संतोषमूलं सुखम्) संतोष सुख का आधार है (विपर्यय:) उससे उल्टा अर्थात् असंतोष (दुःखमूलम्) दुःख का आधार है॥१२॥