Adhyay 4

Manusmriti

Shloka 11 Chapter Four

Adhyay 4
Shloka 11

Chapter Four

Subject: गृहस्थान्तार्गत आजीविका एवं व्रत विषय

260 Shloka
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Adhyay 4 Shloka 11
Shloka
न लोकवृत्तं वर्तेत वृत्तिहेतोः कथं चन। अजिह्मां अशथां शुद्धां जीवेद्ब्राह्मणजीविकाम्॥

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1 Bhashyas
Meaning
गृहस्थ (वृत्तिहेतोः) जीविका के लिये भी (लोकवृत्तं न वर्तेत) कभी शास्त्रविरुद्ध लोकाचार का वर्त्ताव न वर्त्ते, किन्तु जिसमें (अजिह्माम् अशठां शुद्धाम्) किसी प्रकार की कुटिलता, मूर्खता, मिथ्यापन वा अधर्म न हो (ब्राह्मणजीविकां जीवेत्) उस वेदोक्त कर्मसम्बन्धी जीविका को करे॥११॥