Adhyay 3

Manusmriti

Shloka 94 Chapter Three

Adhyay 3
Shloka 94

Chapter Three

Subject: समावर्तन, विवाह एवं पञ्चयज्ञविधान

286 Shloka
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Adhyay 3 Shloka 94
Shloka
कृत्वैतद्बलिकर्मैवं अतिथिं पूर्वं आशयेत्। भिक्षां च भिक्षवे दद्याद्विधिवद्ब्रह्मचारिणे॥

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1 Bhashyas
Subject
अतिथियज्ञ का विधान
Meaning
(एतत् वलिकर्म कृत्वा) उपर्युक्त [३ | ८४-९२] बलिवैश्वदेव यज्ञ करके (पूर्वम् अतिथिम् ग्राशयेत्) पहले प्रतिथि को भोजन खिलाये (च) तथा (भिक्षवे ब्रह्मचारिणे विधिवत् भिक्षां दद्यात्) भिक्षा के लिए आये हुए ब्रह्मचारी के लिए विधिपूर्वक भिक्षा देवे॥९४॥