Adhyay 3

Manusmriti

Shloka 91 Chapter Three

Adhyay 3
Shloka 91

Chapter Three

Subject: समावर्तन, विवाह एवं पञ्चयज्ञविधान

286 Shloka
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Adhyay 3 Shloka 91
Shloka
पृष्ठवास्तुनि कुर्वीत बलिं सर्वात्मभूतये। पितृभ्यो बलिशेषं तु सर्वं दक्षिणतो हरेत्॥

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Meaning
(सर्वात्मभूतये) सब प्राणियों में व्याप्त या आश्रयरूप परमात्मा की सत्ता का रमरण करने के लिए [' सर्वात्मभूतये नम:' से] (पृष्ठवास्तुनि बलि कुर्वीत) घर के पृष्ठभाग में बलिभाग रखे (सर्वं बलिशेषं तु) शेष बलिभाग को (पितृभ्यः) माता-पिता, आचार्य, अतिथि, भृत्य आदिकों को सम्मानपूर्वक भोजन कराने की भावना को स्मरण करने के लिए ['ओं पितृभ्यः स्वधायिभ्य: स्वधा नमः' इस मन्त्र से ] (दक्षिणतः हरेत्) घर के दक्षिण भाग में रखे ॥१९॥