Adhyay 3

Manusmriti

Shloka 90 Chapter Three

Adhyay 3
Shloka 90

Chapter Three

Subject: समावर्तन, विवाह एवं पञ्चयज्ञविधान

286 Shloka
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Adhyay 3 Shloka 90
Shloka
विश्वेभ्यश्चैव देवेभ्यो बलिं आकाश उत्क्षिपेत्। दिवाचरेभ्यो भूतेभ्यो नक्तंचारिभ्य एव च॥

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1 Bhashyas
Meaning
(च) और (विश्वेभ्य: देवेभ्यः) संसार के साधक गुणों की प्राप्ति के लिए संसार के संचालक परमात्मा या विद्वानों के दिव्य गुणों के लिए (आकाशे बलिम् उत्क्षिपेत्) [‘ओं विश्वेभ्यः देवेभ्यः नमः' से] आकाश की ओोर या घर के ऊपर बलिभाग रखे (च) तथा (दिवाचरेभ्यः भूतेभ्य:) दिन में विचरण करने वाले प्राणियों से सुखप्राप्ति के लिए [ओं दिवाचरेभ्यो भूतेभ्य: नमः' से] (नक्तंचारिभ्यः एव) और रात्रि में विचरण करने वाले प्राणियों से सुखप्राप्ति की कामना के लिए [' नक्तंचारिभ्यो भूतेभ्यो नमः' मन्त्र से ] बलि रखे॥९०॥