Adhyay 3

Manusmriti

Shloka 89 Chapter Three

Adhyay 3
Shloka 89

Chapter Three

Subject: समावर्तन, विवाह एवं पञ्चयज्ञविधान

286 Shloka
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Adhyay 3 Shloka 89
Shloka
उच्छीर्षके श्रियै कुर्याद्भद्रकाल्यै च पादतः। ब्रह्मवास्तोष्पतिभ्यां तु वास्तुमध्ये बलिं हरेत्॥

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1 Bhashyas
Meaning
(श्रियै उच्छीर्षके) सबके द्वारा सेव्य परमात्मा की सेवा से राज्यश्री अथवा लक्ष्मी की प्राप्ति के लिये [' श्रियै नमः' से] ईशान कोण की ओर . (च) और (भद्रकाल्यै पादतः) परमात्मा की कल्याणकारी शक्ति की प्राप्ति के लिए ['ओ भद्रकाल्यै नमः' से] पृष्ठभाग अर्थात् नैऋत्य कोण की ओर (कुर्यात्) बलिभाग रखे (तु) और (ब्रह्मवास्तोष्पतिभ्याम्) ब्रह्म-वेदविद्या की प्राप्ति के लिए वेदविद्या के दाता परमात्मा के लिए, वास्तोष्पतिगृहसम्बन्धी पदार्थों के दाता ईश्वर की सहायता के लिए ['ओं ब्रह्मपतये नमः' 'ओं वास्तुपतये नमः' इन से] (वास्तुमध्ये बलि हरेत्) घर के मध्यभाग में बलिभाग रखे॥८॥