Meaning
(एवम्) इस प्रकार (सम्यक् हवि: हुत्वा) अच्छी तरह उपर्युक्त आहुतियां देकर (सर्वदिक्षु प्रदक्षिणम्) सब-दिशाओं में घूमकर (सानुगेभ्य: इन्द्र + अन्तक+ अप्पति + इन्दुभ्यः) परमेश्वर के सहचारी गुरणों इन्द्र= सर्व प्रकार के ऐश्वर्यं से युक्त होना, अन्तक = यम अर्थात् न्यायकारी होना, या प्राणियों के जन्म-मरण का नियन्त्रण रखने वाला गुण, अप्पति = वरुण अर्थात् सबके द्वारा वरणीय सबसे श्रेष्ठ परमात्मा, इन्द्र = सोम अर्थात् आनन्ददायक होना इनके लिए [क्रमश: 'ओं सानुगायेन्द्राय नमः' मन्त्र से पूर्व दिशा में, ' सानुगाय यमाय नमः' से दक्षिण दिशा में, 'प्रों सानुगाय वरुणाय नमः' से पश्चिम दिशा में, ' सानुगाय सोमाय नमः' से उत्तर दिशा में] (बलिं हरेत) भोजन के भाग अर्थात् बलि को रखे॥८७॥